लापरवाह इंसान कदम-कदम पर जीव हिंसा का भागी बनता है -आचार्यश्री महाश्रमण
संसार की अरबों की संपत्ति भी महाव्रत के आगे तिनके जैसी है–आचार्यश्री महाश्रमण
कबूतर की तरह पल-पल पाप से डरें और भँवरे की तरह घरों से थोड़ी-थोड़ी भिक्षा ग्रहण करें साधक–आचार्यश्री महाश्रमण
'समभाव से सहें वेदना' विषय पर युगप्रधान की देशना; — सत्पुरुषार्थ कभी खाली नहीं जाता, आज नहीं तो अगले जन्म में फल निश्चित
Join The Newsletter To Receive The Latest Updates In Your Inbox