ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. किरण कुमार ने लिए आशीर्वाद, ZEE Business के अनिल सिंघवी को मिला आचार्य महाश्रमण 'प्रोफेशनल ऑफ द ईयर' अवॉर्ड
लाडनूं। 22 अगस्त, 2026
जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, धर्मधुरंधर, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी ने लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती परिसर में ‘स्तव-स्तुति मंगल से क्या मिलेगा?’ विषय पर चतुर्विध धर्मसंघ को उत्तरज्झयणाणि आगम के माध्यम से पावन देशना प्रदान की।
ज्ञान योग, कर्म योग और स्वाध्याय की महिमा:
१. स्वाध्याय से बढ़कर कोई तप नहीं : पूज्य आचार्यश्री ने फरमाया कि साधना के क्षेत्र में स्वाध्याय ज्ञान योग का अनूठा प्रयोग है। स्वाध्याय से ज्ञान मिलता है, आलोक प्राप्त होता है और आगे का मार्ग प्रशस्त होता है। १२ प्रकार के तपों में स्वाध्याय के समान कोई दूसरा तप नहीं है।
२. कर्म योग और निष्काम वैयावृत्य : ज्ञान योग के साथ-साथ कर्म योग (सेवा) भी साधना का एक बड़ा स्तंभ है। जो अशक्त, ग्लान या वृद्ध हैं, उनकी सेवा करना कर्म योग है। इसके अलावा जो सेवा के अधिकारी हैं—जैसे आचार्य, उपाध्याय आदि—वे भले ही वृद्ध या अशक्त न हों, फिर भी उनकी सेवा करना महत्त्वपूर्ण है।
३. सेवा में मुख्य-गौण का विवेक : जो संत या साधक वैयावृत्य (सेवा) के कार्य में नियुक्त हैं, उनके लिए सेवा मुख्य कार्य है और स्वाध्याय गौण हो सकता है।
स्तव-स्तुति, भाव पूजा और बोधि लाभ:
१. भक्ति योग और स्तुति का साहित्य मर्म : गुणवानों की निश्चल और निरहंकार भाव से प्रशंसा करना भक्ति योग है। साहित्यिक दृष्टि से १ से ३ श्लोक (या कुछ मान्यताओं में ७ श्लोक) वाले गुणोत्कीर्तन को 'स्तुति' और उससे बड़े श्लोकबद्ध गुणोत्कीर्तन को 'स्तव' कहा जाता है।
२. द्रव्य स्तव बनाम भाव स्तव : स्तव दो प्रकार के होते हैं—द्रव्य
स्तव और भाव स्तव। राजाओं या लौकिक देवी-देवताओं की स्तुति द्रव्य स्तव है, जिसमें हिंसा की संभावना भी रहती है। इसके विपरीत अरिहंत, सिद्ध, आचार्य और साधु-साध्वियों की निष्काम भावपूर्वक गुण-पूजा करना 'भाव स्तव' है।
३. बोधि लाभ और उच्च गतियों की प्राप्ति : स्तव-स्तुति से जीव सम्यक ज्ञान, दर्शन और चरित्र बोधि प्राप्त करता है तथा इनकी पुष्टता होती है। बोधि सम्पन्न जीव 'अंत क्रिया' (मोक्ष) के योग्य बनता है। यदि मोक्ष न भी मिले, तो वह १२वें देवलोक, ९ ग्रैवेयक अथवा ५ अनुत्तर विमानों तक उच्च गति प्राप्त करता है।
४. तादात्म्य भाव और सिद्धान्त भक्ति : जिसकी भक्ति करें, उसके साथ ऐसा तादात्म्य (एकात्मता) हो कि उनके गुण हमारे भीतर संक्रमित होने लगें। आराध्य के साथ-साथ 'तत्त्व' की भी भक्ति होनी चाहिए—अर्थात् जिनेश्वर भगवान द्वारा प्रवेदित सत्य पर निशंक निष्ठा रखना और ईमानदारी, अचौर्य आदि आदर्शों को जीवन में उतारना ही सच्ची सिद्धान्त भक्ति है।
ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. किरण कुमार ने ग्रहण किया आशीष
TPF का १९वां राष्ट्रीय अधिवेशन: अनिल सिंघवी अलंकृत–
तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम (TPF) के १९वें राष्ट्रीय अधिवेशन में जी बिजनेस (ZEE Business) के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी को 'आचार्य महाश्रमण प्रोफेशनल ऑफ द ईयर अवॉर्ड 2026' से अलंकृत किया गया।
विशिष्ट जनों की उपस्थिति : अधिवेशन में TPF के निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष हिम्मत मांडोत, पूर्व मुख्य न्यासी एस. के. सिंघी और पूर्व अध्यक्ष पंकज ओस्तवाल ने विचार व्यक्त किए।
गुरुदेव का पावन पाथेय: आचार्यश्री ने फरमाया कि TPF प्रबुद्धजनों का संगठन है। बुद्धिजीवी धर्म और सेवा
से जुड़कर चिकित्सा, कानून व वाणिज्यिक क्षेत्रों में समाज का महान उपकार कर सकते हैं।